माता सीता के श्राप की सजा आज भी भुगत रहे हैं, पृथ्वी पर मौजूद यह चार लोग

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हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ रामायण की हिंदुओं में बहुत मान्यता है। रामायण में कही गई हर एक बात को मानव जीवन के साथ जोड़ा जाता है। रामायण ग्रंथ में भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाओं का वर्णन किया गया है। इसी ग्रन्थ में श्री राम जी की पत्नी सीता मां से जुड़ी एक ऐसी घटना का वर्णन किया गया है, जिसका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है।

ऐसा बताया जाता है कि माता सीता ने इस काल के दौरान कुछ लोगों को झूठ बोलने के लिए श्राप दिया था। जिन लोगों को माता सीता ने श्राप दिया था, उसका प्रभाव आज भी मौजूद है।

आइए जानते हैं कि आखिर वह कौन सी घटना है, जिसकी वजह से मां सीता को श्राप देना पड़ा और वह कौन से लोग हैं, जो आज भी माता सीता द्वारा दिए गए श्राप का फल भुगत रहे हैं।दरअसल यह घटना उस समय की है जब अयोध्या के राजा श्री दशरथ जी की मृत्यु हुई थी। बताया जाता है कि दशरथ जी की मृ-त्यु के बाद भगवान श्री रामचंद्र जी भाई लक्ष्मण के साथ उनकी पिंड दान की सामग्री लेने के लिए गए हुए थे। परंतु किसी कारणवश उन्हें आने में काफी समय लग रहा था और इधर पिंडदान का समय निकलता जा रहा था।

ऐसे में जब सीता माता ने देखा कि पिंडदान का उचित समय खत्म होने वाला है, तो उन्होंने श्री राम जी की प्रतीक्षा करने के बजाय उनकी अनुपस्थिति में ही एक निश्चित समय पर अपने ससुर का पिंडदान विधि पूर्वक कर दिया। जब श्री रामचंद्र जी वापस लौट कर आए तो, सीता जी ने रामचंद्र जी से पिंडदान से जुड़ी सभी बातें बतायी। और यह भी बताया कि उन्होंने समय पर विधि पूर्वक पिंडदान किया है। साथ ही सीता मां ने यह भी कहा कि, वह पंडित, गाय, कौवा और फल्गु नदी जो पिंडदान के समय वहां पर मौजूद थे, उनसे इसके बारे में पूछ सकते हैं।

श्री रामचंद्र जी ने जब इन चारों से पिंड दान के बारे में पूछा तो इन चारों ने किसी भी प्रकार के पिंडदान किये जाने की बात को इंकार कर दिया। इन चारों के झूठ बोलने के आचरण से नाराज होकर सीता मां ने इन चारों को श्राप दिया। सीता जी ने पंडित को श्राप देते हुए कहा कि-पंडित के पास कितना भी धन आ जाए पर उसकी दरिद्रता नहीं मिटेगी।

गाय को श्राप देते हुए सीताजी ने यह कहा कि- हर घर में पूजा होने के बाद भी गाय को लोगों का जूठा खाना पड़ेगा।

कौवे को श्राप मिला कि अकेले खाने से कभी भी पेट नहीं भरेगा, हमेशा झुंड में खाना खाएगा और आकस्मिक मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। वहीं फल्गु नदी को सीता मां ने श्राप दिया कि- कितना भी पानी मिल जाए लेकिन यह नदी हमेशा सूखी ही रहेगी।

त्रेता युग में सीता मां द्वारा दिए गए श्राप का ही नतीजा है कि आज भी ये चारों इस सजा को भुगत रहे हैं। आज भी ब्राह्मण के पास कितना भी धन आ जाए पर उसके मन में दरिद्रता बनी ही रहती है। गाय के साथ भी ऐसा ही है पूज्यनीय होने के बाद भी उसे जूठा खाना ही पड़ता है। वहीं अगर बात करें कौवे की तो कभी आपको हमेशा झुंड में खाना खाते हुए दिखाई देंगे। और फल्गु नदी आज भी सूखी ही रहती है।

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