निर्जला एकादशी व गुरूवार का बना शुभ संयोग, 2 केले के इस उपाय से बदल जाएगी किस्मत

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कल 13 जून है और ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी भी है, ये दिन निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। हर बार की अपेक्षा इस बार की निर्जला एकादशी खास है क्योंकि ये गुरूवार के दिन पड़ रहा है। आपको तो ये पता ही होगा कि गुरूवार का दिन भगवान विष्णु का होता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से साल भर की एकदाशी का पुण्य प्राप्त हो जाता है।

वैसे सामान्यत तो पूरे साल भर में कुल 24 एकादशी होते हैं लेकिन उन सभी एकादशी में सबसे ज्यादा महत्व निर्जला एकादशी का होता है, इसे भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी में बिना जल के व्रत रखा जाता है, इस वजह से इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।

माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस एकादशी का व्रत रखता है उसे सालभर की 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है।

अगर शास्त्रों में वर्णित कथाओं की माने तो पांचो पांडवों में से दूसरे नंबर वाले पांडव यानि की भीमसेन खाने-पीने के बड़े शौकीन थे। जिसकी वजह से वो अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख पाते थे इसलिए उनको छोड़कर सभी पांडव और द्रौपदी एकादशी का व्रत किया करते थे। जिस वजह से भीम बहुत दुखी थे कि वे ही भूख की वजह से व्रत नहीं रख पाते हैं। उन्‍हें लगता था कि ऐसा करके वह भगवान विष्‍णु का निरादर कर रहे हैं इसलिए महर्षि व्‍यास ने उन्हे निर्जला एकादशी का व्रत रखने को बताया।

केले का विशेष उपाय

गुरूवार के दिन इस त्योहार के पड़ने से कई लाभ हो सकते हैं। जैसा कि आप भी जानते होंगे कि गुरूवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करने की भी मान्यता है, लेकिन हर जगह केले का वृक्ष नहीं मिल पाता है। इसलिए आप इसकी जगह आप 2 केले लेकर उसकी विधिवत लाल कपड़े पर रखकर पूजन करें। पूजन के दौरान ऊं नमों भगवते वासुदेवाय का जाप करें। ऐसा करने से आपकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। इसके अलावा आप चाहे तो पूजन के बाद अपनी मनचाही इच्छा मांगे। पूजन के बाद रात भर केले को मंदिर में पड़े रहने दें, इसके बाद अगले दिन सुबह नहाकर उन दोनों केले को माथे से लगाकर खुद व अपने परिवार को प्रसाद के रूप में ग्रहण कराए।

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