पुरुषों को धीरे-धीरे नपुंसक बना रहे हैं ये 10 काम, दूसरा काम करते हैं सभी लड़के

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खराब लाइफस्टाइल और डाइट की वजह से आजकल युवा कम उम्र में ही यौन संबंधी विकारों की चपेट में आ रहे हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि शादी की उम्र से पहले ही कई युवाओं को नपुंसकताऔर शीघ्रपतन  जैसी सेक्स समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर शादीशुदा जीवन पर पड़ता है। एक अध्ययन के अनुसार, यौन संबंध के दौरान अधिकतर भारतीय सिर्फ दो मिनट ही बिस्तर पर टिक पाते हैं जबकि किसी महिला को चरम सुख पाने में कम से कम दस से पंद्रह मिनट का समय लगता है।

खराब खानपान और जीवनशैली की वजह से पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्याएं जैसे स्पर्म काउंट कम होना, गतिशीलता की कमी या असामान्य या मृत शुक्राणु आम समस्या है, जो नपुंसकता का सबसे बड़ा कारण है। अगर फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं लेकिन बार-बार कोशिश करने के बावजूद फेल हो रहे हैं, तो हो सकता है कि आपकी ही कुछ खराब आदतों के कारण आपके पापा बनने का सपना अधूरा रह जाता हो।

दिल्ली के मशहूर सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर विनोद रैना के अनुसार, पैंट की जेब में मोबाइल रखना, लैपटॉप को पैरों पर रखकर काम करना, कार्बोनेटिड ड्रिंक्स पीना आदि गलत आदतों की वजह से आपकी स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं इन छोटी-छोटी आदतों की वजह से आपको नपुंसकता का भी खतरा हो सकता है। इस तरह की आदतें पुरुषों में स्पर्म की मात्रा को कम कर सकती हैं। हालांकि आप इन आदतों को बदलकर शुक्राणुओं की संख्या और क्वालिटी को बढ़ाकर पापा बनने का सुख प्राप्त कर सकते हैं।

चलिए जानते हैं क्या-क्या हैं वो गलत आदतें

1) लैपटॉप को पैरों पर रखना

एक रिपोर्ट के अनुसार, अंडकोष शरीर के तापमान से लगभग दो डिग्री ठंडे रहने चाहिए। ऐसे में यदि आप अपनी गोद में लैपटॉप को रखकर काम करते हैं, तो इस आदत को जितनी जल्दी छोड़ सकते हैं, उतना ही आपके लिए अच्छा होगा। लैपटॉप से निकलने वाली गर्म हवा से स्पर्म पर नकारात्मक असर पड़ता है।

2) पैंट की जेब में मोबाइल रखना

आजकल सभी पुरुष पैंट में मोबाइल फोन रखते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए, क्योंकि फोन से निकलने वाली हानिकारक रेडिएशन स्पर्म के प्रजनन को कम करते हैं। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि जो लोग मोबाइल को अपनी पैंट की जेब में रखते हैं, उनमें स्पर्म 9 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं।

3) टाइट अंडरवियर और पैंट पहनना

वीर्यकोष में हेल्दी स्पर्म तभी अच्छी तरह से बनते हैं, जब उस हिस्से का तापमान शरीर के तापमान से कम होगा। इसी वजह से वीर्यकोष शरीर से बाहर त्वचा की एक थैली में होता है। अधिकतर पुरुष टाइट जींस और अंडरवियर पहनने लगे हैं। इससे वह भाग शरीर के तापमान के बराबर गर्म हो जाता है, जिससे स्पर्म के बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। जो थोड़े-बहुत बनते भी हैं, वे असामान्य या निष्क्रिय होते हैं।

4) कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पीना

एक शोध में तो यह भी कहा गया है कि बीयर, शराब से भी स्पर्म की मात्रा कम होती है। इन सभी पेय पदार्थों में शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो स्पर्म बनने की कार्यप्रणाली में रुकावट डालती हैं।

5) चाय-कॉफी का सेवन

अक्सर पुरुष ऑफिस में काम करने के दौरान छह-सात कप चाय या कॉफी पी जाते हैं। कैफीन का अधिक सेवन पुरुषों के प्रजनन शक्ति पर प्रतिकूल रूप से प्रभाव डालता है। ऐसे में कोशिश करें की एक या दो कप ही चाय या कॉफी पिएं।

6) कीटनाशक फल-सब्जियां खाना

आजकल ज्यादातर फल, सब्जियों, फसलों में कीटनाशकों का इस्तेमाल होने लगा है। ये शरीर में जाकर नपुंसकता, कैंसर आदि जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। बाजार से लाई गई सब्जियों और फलों को अच्छी तरह से धोकर ही खाएं।

7) नींद में कमी

यदि आप सात से आठ घंटे नहीं सोते, तो इसका असर स्पर्म के बनने की प्रक्रिया पर भी पड़ता है। जिस तरह शरीर और मस्तिष्क को आराम चाहिए, ठीक उसी तरह स्पर्म को भी रेस्ट की जरूरत होती है। यदि आप भरपूर नींद लेते हैं, तो इससे स्पर्म काउंट में वृद्धि होती है।

8) नशीले पदार्थों का सेवन

आजकल लड़के खूब पार्टी करते हैं और जमकर नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. कोकीन या गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन के कारण भी पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्‍या और उनकी गुणवत्ता कम हो जाती है। पुरुषों को कोकीन, गांजा जैसी नशीली चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए। ये चीज़ें आपको नपुंसक बना सकती हैं।

9) साइकिल चलाना

रिसर्च के अनुसार पता चला है कि जिन पुरुषों को हफ्ते में तीन घंटे साइकिल चलाने की आदत है, उन्‍हें नपुंसक होने का चांस उन पुरुषों की तुलना में बढ़ जाता है जो बिल्‍कुल भी या कम समय के लिये साइकिल चलाते हैं।

10) सप्‍पलीमेंट का सेवन

आमतौर पर देखा जाता है कि लोग इतना ज्‍यादा जंक फूड खाने लग गए हैं कि उन्‍हें सही प्रकार का प्रोषण नहीं मिल पाता। ऐसे शरीर में उस पोषण की कमी को पूरा करने के लिये वे दवाई की दुकान से सप्‍पलीमेंट लेने लग जाते हैं, जिसका सीधा असर नपुंसकता पर पड़ता है।

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