भारत ऐसे शहर जहां आलू और प्याज से भी कम दाम में बिकते हैं काजू

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काजू एक ऐसा मेवा है जो स्वाद के साथ-साथ सेहत से भरपूर है। बच्चों से लेकर बूढ़े तक हर उम्र के लोग काजू खाना पसंद करते हैं। काजू का इस्तेमाल तरह तरह के पकवान बनाने में भी किया जाता है। इसका प्रयोग मिठाई, हलवा इत्यादि बनाने में किया जाता है। साथ ही बहुत से लोग इसका इस्तेमाल सब्जी में डालने में भी करते हैं। काजू में सोडियम, पोटैशियम, प्रोटीन, विटामिन ए, सी, बी 6, विटामिन डी, विटामिन बी 12, कैल्शियम तथा मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी है। काजू खाने से ब्लड प्रेशर की समस्या में आराम मिलता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। जिससे हृदय संबंधी समस्या से निजात मिलती है। उपरोक्त बातो से यह बात तो साफ तौर पर जाहिर होती है कि काजू में सेहत का खजाना छुपा हुआ है। अब बात करते है काजू के कीमत की। शुरुआत करते हैं भारत की राजधानी दिल्ली से, यहां पर काजू की कीमत लगभग ₹800 प्रति किलोग्राम है। और काजू की यही कीमत देश के लगभग अन्य हिस्सों में भी है। काजू की यह कीमत इसे आम आदमी की पहुँच से दूर ले जाती है।

आज के इस पोस्ट में हम आपको भारत के कुछ ऐसे जिले के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर काजू की कीमत बहुत ही कम है। और इस कम कीमत के पीछे की क्या वजह है, यह भी हम आपको इस पोस्ट के जरिये बताएंगे। दरअसल हम बात कर रहे हैं, दिल्ली से लगभग 1200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित झारखंड के जामताड़ा जिले की। खबरों के मुताबिक यहां पर काजू की कीमत मात्र 10 से ₹20 प्रति किलोग्राम है, जो वाकई में बहुत कम है। यहां पर काजू के इतने कम दाम के पीछे की वजह है, यहाँ पर मौजूद लगभग 49 एकड़ के क्षेत्र में फैले काजू के बागान। काजू का यह बागान जामताड़ा ब्लॉक से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर काजू की पैदावार काफी ज्यादा मात्रा में होती है। और सबसे खास बात यह है कि यहां पर काम करने वाले महिलाएं तथा पुरुष यहां पर पैदा होने वाले काजू को बेहद कम दामों में बेच देते हैं। जिसकी वजह से यहां के एरिया में काजू की कीमत बहुत कम है।

यहां पर पाए जाने वाले काजू के बागान के पीछे भी एक मजेदार कहानी है। ऐसा बताया जाता है कि जामताड़ा के पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू खाना बेहद पसंद था। यही वजह थी कि वह चाहते थे कि उन्हें सस्ती तथा ताजी का काजू खाने को मिले। जामताड़ा में लगाए गए काजू के बागान इसी का उदाहरण है। कृपानंद झा ने जामताड़ा में काजू का बागान लगाने के पीछे कड़ी मेहनत की। वह उन लोगों से मिले जो काजू की खेती के ज्ञाता माने जाते हैं। काफी रिसर्च करने के बाद कृपानंद झा ने काजू का बागान लगाने का कार्य शुरू किया। और वह इस कार्य में सफल रहे। बताया जाता है कि इस बागान में काजू की वार्षिक पैदावार हजारो क्विंटल की है।

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