गोरखपुर किडनैपिंग एंड मर्डर केस: अपहरण के चंद घंटे बाद ही बलराम को दी दर्दनाक मौत, जानिए कब क्‍या हुआ

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बलराम के अपहरण की प्लानिंग करीब 15 दिन से चल रही थी। अपहर्ताओं ने अपहरण के बाद फिरौती के लिए पहले सिमकार्ड की व्यवस्था की थी। उन्होंने एक दुकानदार रिंकू गुप्ता की मदद से फर्जी आईडी पर सिमकार्ड हासिल किया था। इसमें नीतेश पासवान नाम के युवक ने मदद की थी। 15 जुलाई को उन्हें सिमकार्ड मिल गया था। उसके बाद वे मौके की तलाश में थे और फिर रविवार को गांव का एक युवक निखिल भारती ने बलराम को घुमाने के बहाने स्कूटी से अपने साथ ले गया था।

बलराम अक्सर निखिल भारती के साथ घूमता था। काफी देर तक घुमाने के बाद निखिल बंगला चौराहे के पास एक दुकान के अंदर ले गया था। यह दुकान जंगल धूसढ़ के अजय गुप्ता की है। पहले से मौजूद अपहर्ताओं में से एक ने बलराम को यहीं बेहोशी का इंजेक्शन दिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बेहोश करने के बाद उन्होंने बलराम के पिता महाजन के पास कॉल कर एक करोड़ की फिरौती मांगी थी। फिरौती मांगने के लिए दयानंद ने अपने मोबाइल का इस्तेमाल किया था। अपने मोबाइल में उसने फर्जी आईडी पर लिए गए सिमकार्ड का इस्तेमाल किया था।

पहली बार जब अपहर्ताओं ने कॉल की थी, तब बलराम के पिता फोन नहीं उठाए थे इसलिए बात नहीं हो पाई थी। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि बलराम के पिता महाजन ने जब तक पुलिस को सूचना दी, उससे पहले बलराम की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने पांच बजे के करीब पिपराइच थाने की पुलिस को सूचना दी थी और हत्या चार से पांच के बीच की ही बताई जा रही है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

अब पुलिस यही पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीन बजे के करीब जब उन्होंने फिरौती मांगी थी तब बलराम की हत्या कर दी थी या फिर उस वक्त तक सिर्फ बेहोश किया था। पकड़े गए अपहर्ताओं से पूछताछ पता चला है कि हत्या चार से पांच बजे के बीच हुई थी। हालांकि अन्य लोगों के पकड़े जाने के बाद ही पुलिस इस नतीजे पर पहुंच पाएगी। यही नहीं यह भी पता चला है कि बलराम के हाथ और पैर पेटीकोट से बांधे गए थे। सीने पर और गले पर निशान थे उसके सीने पर चढ़कर और गले को दबाकर जान ली गई थी। पुलिस के मुताबिक रस्सी से गला कसा गया था। रात नौ बजे अन्तिम कॉल करने से पहले अपहर्ताओं ने लाश को ठिकाने लगा दिया था। पुलिस सूत्रों की माने तो पिता ने जब पुलिस को सूचना दी तब तक उसकी हत्या हो चुकी थी।

दयानंद की गिरफ्तारी के बाद शव तक पहुंची पुलिस

पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि बच्चे की अपहरण और हत्या में करीब सात से आठ लोग शामिल हैं। दो लोगों ने फर्जी आईडी पर सिमकार्ड मुहैया कराया है जबकि एक ने हत्या के लिए अपनी दुकान मुहैया कराई है। वहीं गांव का एक युवक निखिल भारती बलराम को बहला फुसलाकर अपने साथ लेकर निकला था। फिरौती की कॉल से पहले तक वह उसे घूमाता रहा। फिर अजय गुप्ता नाम के आरोपित की दुकान में बच्चे की हत्या हुई थी। जहां बलराम का शव मिला है, वह दुकान उससे पहले सड़क के किनारे ही स्थित है। दुकान में ही अन्य अपहर्ताओं ने मिलकर हत्या की है। दयानंद प्रापर्टी डीलिंग का काम करता है। उसे पता था कि महाजन गुप्ता के पास इस दिनों काफी पैसा है। महाजन ने प्रॉपर्टी भी बेची थी।

 

26 और 27 जुलाई को बलराम के साथ कब,क्‍या हुआ

12 बजे बलराम लापता हुआ
1 बजे उसके पिता के मोबाइल पर अपहर्ताओं ने फोन किया, फोन नहीं उठा
3 बजे अपहर्ता निखिल भारती बलराम को लेकर अजय गुप्ता के दुकान पर पहुंचा, यहां उसे बेहोश किया गया
3.5 बजे अपहर्ताओं ने दोबारा कॉल की और एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी
3.10 बजे फिर कॉल की और फिरौती की रकम को दोहराते हुए धमकी दी
4.30 बजे बलराम के पिता महाजन ने पुलिस को डायल 112 पर सूचना दी
5.00 बजे पुलिस महाजन के घर पहुंची, पूछताछ के बाद तलाश शुरू हुई
9.00 बजे अपहर्ताओं ने अन्तिम काल की और महाजन 20 लाख देने को तैयार हुए
10.00 बजे पुलिस ने तीन लोगों को उठाया उसमें एक मोबाइल दुकानदार भी शामिल था

27 जुलाई को ये हुआ

12.00 बजे पुलिस ने दयानंद को उठाया, उससे पूछताछ शुरू हुई
3.00 बजे दयानंद ने बलराम की हत्या की जानकारी दी
4.30 बजे दयानंद की निशानदेही पर पुलिस ने शव बरामद किया
5.00 बजे पुलिस ने निखिल सहित अन्य को गिरफ्तार कर लिया
9.30 बजे एसएसपी डा. सुनील गुप्ता ने घटना के बारे में जानकारी दी

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