मंदी की आहट पर बोले गोविंदाचार्य

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भारतीय जनता पार्टी के आरएसएस विचारक गोविंदाचार्य ने कहा है , कि मौजूदा समय देश की खराब अर्थव्यवस्था के पीछे 1991 का उदारीकरण है। उनका मानना है कि अर्थव्यवस्था का जब वैश्वीकरण होता है ,तो वह अपने साथ छुपे तौर पर मंदी और रोजगार संकट भी लाती है ।बातचीत के दौरान गोविंदाचार्य ने कहा कि हमें देश की अर्थव्यवस्था की बेसिक स्ट्रेंथ को समझना होगा। तभी कोई कदम उठाना फायदेमंद रहेगा ।

इन्होंने कृषि और इससे जुड़े उत्पादों की इंडस्ट्री पर ज्यादा फोकस करने की बात कही कि हमें दलहन-तिलहन के उत्पादन और खाद्य परिष्करण पर जोर देना होगा । जो हमारी यूएसपी रही है । उसे समझते हुए जब अर्थव्यवस्था का मॉडल बनाएंगे तभी भला होगा । इससे रोजगार संकट भी दूर हो सकता हैं, गोविंदाचार्य ने कहा कि हार्डवेयर सेक्टर में हम पिटे हैं । इस तरफ तो हमने हाथ ही नहीं लगाया।

यहां जमीन और जनसंख्या का अनुपात ठीक नहीं है.ऐसे में दूसरे देशों की जहां लैंड और पॉपुलेशन का अनुपात ठीक है । क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था के हिसाब से नहीं चल सकते । गोविंदाचार्य ने कहा कि भारत को अगर अमेरिका बनाने निकलेंगे तो यह ब्राजील बन जाएगा ।

यहां की अर्थव्यवस्था का ब्राजीलीकरण हो जाएगा । ब्राजील को भी अपनी नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा है । बता दें कि दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और ब्रिक्स देशों में शामिल ब्राजील को 2014 से भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ा था । इसेलिए दक्षिण अमेरिका के इस देश में मंदी के चलते लाखों नौकरियों का संकट पैदा हुआ था ।

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