अयोध्या केस में सुनवाई का 17वां दिन आज

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आज की सुनवाई खास इसलिए है , क्योंकि मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील देने की शुरुआत हुई है ।सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन अदालत में अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं ।राजीव धवन ने कोर्ट में कहाँ कि मेरे मित्र वैद्यनाथन ने अयोध्या में लोगों द्वारा परिक्रमा करने संबंधी एक दलील दी है। लेकिन कोर्ट को मैं यह बताना चाहता हूं ,कि पूजा के लिए की जाने वाली भगवान की परिक्रमा सबूत नहीं हो सकती । यहां इसे लेकर इतनी दलीलें दी गईं लेकिन इन्हें सुनने के बाद भी मैं, यह नहीं दिखा सकता कि परिक्रमा कहां है. इसलिए यह सबूत नहीं है.

शुक्रवार तक अदालत में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा, हिंदू महासभा, श्रीरामजन्मभूमि पुनरुत्थान समिति की ओर से दलील पेश की जा चुकी है. हिंदू पक्ष के सभी पक्षकारों की तरफ से अभी तक अदालत में ऐतिहासिक तथ्यों, पुराणों, रिपोर्ट्स का हवाला दिया जा चुका है.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई संवैधानिक पीठ कर रही है. जिसकी अगुवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं, उनके अलावा इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि पुनरुत्थान समिति के वकील पीएन मिश्रा ने अदालत में अपनी दलील पूरी की थी. उनकी ओर से अदालत में बताया गया कि उस जगह पर आखिरी नमाज 16 दिसंबर 1949 को हुई थी, जिसके बाद दंगे हो गए थे और उसके बाद प्रशासन ने नमाज बंद करवा दी थी.

आपको बता दें कि कई साल से चलते आ रहे इस मसले को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा था, लेकिन उससे कोई हल नहीं निकल पाया था. जिसके बाद अदालत की ओर से इस मसले पर रोजाना सुनवाई की जा रही है, पहले ये सुनवाई हफ्ते में तीन दिन हो रही थी लेकिन अब हफ्ते में पांच दिन मामला सुना जा रहा है.

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